भगवान श्री कृष्ण ने क्यों हमेशा के लिए बांसुरी का त्याग कर दिया
तो जैसे श्री राम जी की पहचान धनुष बाण से है वैसे ही भगवान श्री कृष्ण की
पहचान मोर मुकुट और बांसुरी है जी हाँ हम हमेशा किसी भी मंदिर या तस्वीर में भगवान
श्री कृष्ण को देखते है तो उनके हाथ में या होंटो पर बांसुरी जरुर होती है लेकिन
एक समय ऐसा भी आया था जब भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी को
हमेशा के लिए त्याग दिया था और अपनी बांसुरी को तोड़ दिया और फिर कभी उन्होंने बांसुरी
को छुआ तक नहीं तो आखिर भगवन श्री कृष्ण ने बांसुरी को हमेशा के लिए त्याग दिया आज
इस लेख में हम आपको यही प्रसंग यही घटना यही जानकारी शेयर करने जा रहे है तो आइये शुरु करते है :-
क्यों तोड़ दी श्री कृष्ण ने अपनी सबसे प्रिय बांसुरी को
सभी जानते है राधा रानी और बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय थी
जब भगवान बांसुरी बजाते तो राधा रानी बांसुरी की धुन पर दौड़ी-दौड़ी चली आती तो
बांसुरी और राधा रानी का भी एक अलग ही रिश्ता बन गया था राधा रानी भगवन श्री कृष्ण
की प्रियेशी थी आप सभी जानते है कृष्ण और राधा का नाम साथ में ही लिया जाता है मंदिर
में भगवान श्री कृष्ण को उनकी प्रियतमा राधा रानी के साथ ही दिखाया जाता है
तो हुआ यूँ की भगवान ने धरती पर विशेष उद्देश्यों के लिए अवतार लिया
था तो एक समय ऐसा आया था जब भगवान श्रीकृष्ण को राधारानी को छोड़कर हमेशा के लिए
अलग होना था जब उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए वृंदावन को छोड़ना था मथुरा
में अपाने मामा कंस का उद्धार करना था और फिर इसके आगे एक महाभारत भी उनके इन्तजार
में थी ।
तो भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन छोड़कर जाने लगे तो तो उनका मन बहुत
व्याकुल था राधा उनसे मिलने आई और भगवन को ना जाने के लिए मनाने लगी लेकिन भगवन ने
राधा रानी को समझया की उन्हें जाना ही होगा कृष्ण के समझाने पर राधा रानी मान तो
गयी लेकिन राधारानी ने श्रीकृष्ण के जाने से पहले उनसे एक वचन लिया कि राधा के देह
त्याग से पहले वो यानी श्रीकृष्ण उन्हें एक बार जरुर मिलने आयेंगे भगवान श्रीकृष्ण
ने हां कर दी और फिर वहां से मथुरा चले गए।
भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में कंस का वध किया और फिर भगवन का विवाह रुकमनी
जी से हो गया फिर भगवान कृष्ण ने अपनी नगरी द्वारका बसा ली और वहां राज करने लगे महाभारत
के युद्ध में भी सभी ने उन्हें देखा ही है इधर राधारानी का भी विवाह हो गया सभी
अपने अपने कर्तव्यों पथ का पालन कर रहे थे लेकिन राधन रानी का प्रेम श्रीकृष्ण के
लिए कभी कम नही हुआ वो हमेश श्रीकृष्ण की
प्रतीक्षा करती रहती
समय बीतता चला गया जैसा की पृथ्वी लोक मृत्यु लोक के नियम है समय के
साथ हर व्यक्ति की उम्र बढती है वो वृद्ध दिखने लगता है तो राधा रानी ने भी मृत्यु
लोक के नियम का सम्मान किया और वो बूढ़ी हो
गयी तब उन्होंने अपने अंतिम समय में भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान किया श्रीकृष्ण भी
अपने दिए वचन के अनुसार उनसे मिलने आ
गए जब भगवान श्री कृष्ण ने राधारानी का ऐसा रूप देखा तो श्रीकृष्ण बहुत अधिक व्याकुल
हो गए और उनसे कुछ मांगने को कहा किन्तु माता राधा ने कुछ भी मांगने से मना कर
दिया व अपनी अंतिम इच्छा प्रकट की उन्होने श्रीकृष्ण को पहले की तरह बांसुरी
की मधुर धुन सुनाने के लिए कहा।
राधा रानी की इच्छा का सम्मान करते हुए श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी
निकाली और उसे बजाने लगे उस दिन श्रीकृष्ण ने लगातार दिन-रात बांसुरी की मधुर धुन
बजाई और बांसुरी की उस धुन को सुनते-सुनते ही माता राधा ने अपने प्राणों का त्याग
कर दिया अपनी सबसे प्रिय राधा रानी के देह त्याग से श्रीकृष्ण बहुत ज्यादा आहत हो
गए और उन्होंने उसी समय अपनी बांसुरी को दो हिस्सों में तोड़ दिया और पास की झाड़ी
में फेंक दिया ।
✍: Narendra Agarwal ✍
क्यों तोड़ दिया श्री कृष्ण ने अपनी प्रिय बांसुरी को विडियो देखे
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